बाल दिवस के मौके पर सिटीज़नस अवेयरनेस ग्रुप, सरकार से मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2017 को आगामी संसदीय सत्र में पास करने की अपील करता है

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सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 10,000 से अधिक मासूमों ने गवाई जान
चंडीगढ़, 13 नवंबर, 2017: बच्चों के दिवस के अवसर पर, सामाजिक संगठन, सिटीज़नस अवेयरनेस ग्रुप ने संसद में आने वाले सर्दियों के सत्र में मोटर्स वाहन बिल 2017 पास करके सड़कों पर बच्चों की अनमोल ज़िंदगी बचाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया है।
कुछ तथ्यों को साझा करते हुए, नागरिक जागरूकता समूह के अध्यक्ष सुरिंदर वर्मा ने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनियाभर में सड़कों पर हर साल 12 लाख से ज्यादा लोग मरते हैं, और 5 करोड़ की संख्या तक घायल हो जाते हैं। सड़क यातायात में घायल और मृत्यु के मामलों से 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, जो सालाना 186,000 से अधिक सड़क यातायात की मौत का कारण होता है। सड़क दुर्घटनाओं के चलते पूरे विश्व में 220 से अधिक बच्चे (5-14 वर्ष) घातक अंत से दो-चार होते हैं। भारत में 2016 में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 10,000 से अधिक मासूमों ने जान गवाई”.

विशेषकर जब भारत की सड़कों पर बच्चों की सुरक्षा की बात आती है, तो बतौर सशक्त विकास लक्ष्यों के हस्ताक्षरकर्ता, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत पर उचित कानून बनाने की जिम्मेदारी है। बहरहाल, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक 2017 को पहले सत्र में लोकसभा ने पहले ही मंजूरी दे दी है लेकिन राज्यसभा द्वारा पारित होना अभी भी बाकि है।

बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं, लिहाजा उनकी सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए। सड़क दुर्घटनाएं स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी समस्या उतपन्न कर रही है। गौरतलब हो कि सड़क यातायात दुर्घटनाओं से बच्चे गंभीर रूप से प्रभावित होते है, ऐसे में उनका सीमित भौतिक, संज्ञानात्मक और सामाजिक विकास होता है, जो सड़क दुर्घटनाओं के कारण उन्हें युवाओं की तुलना में अधिक संवेदनशील बनाता है।

सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि ’’यदि यह विधेयक आगले सत्र में पास किया जाता है, तो लंबे समय के लिए हम नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल सकते हैं। इन हताहतों की संख्या हजारों निर्दोष बच्चों और युवाओं को शामिल कर सकती है। लिहाजा शीतकालीन सत्र में विधेयक का पास होना महत्वपूर्ण है।

संगठन सड़क सुरक्षा पर लंबे समय से काम कर रहा है, विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने के अलावा सड़क सुरक्षा पर मजबूत कानून लाने के लिए केंद्रीय और राज्य सरकार को विभिन्न प्रतिनिधियों से बात कर रहा है”।

कड़े बिल में प्रस्तावित प्रमुख प्रावधान

1 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षा बेल्ट या बाल संयम प्रणाली को कार में अनिवार्य है, जिसका पालन न करने पर 1000 रुपये का दंड है।

2. किशोरों के लाइसेंस रद्द होने के साथ ही अभिभावक/वाहन स्वामी को युवाओं के चालकों के पंजीकरण के लिए 25,000 रूपये जुर्माना अथवा 3 साल की कारावास के साथ दोषी माना जाएगा।

3. हेलमेट नहीं पहनने के लिए 1000 रुपये का जुर्माना और ड्राइविंग लाइसेंस के बाद को अयोग्य करार दिया जाएगा।

भारत सड़क सुरक्षा पर ब्रासिलिया घोषणापत्र के लिए एक हस्ताक्षरकर्ता है, जिसका उद्देश्य 2020 तक 50 प्रतिशत तक सड़क दुर्घटनाओं को घटाने का लक्ष्य है। यह केवल सख्त और मजबूत सड़क सुरक्षा कानून के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

Date: 
Monday, November 13, 2017