रचनात्मकता बढ़ाने के साथ मन की शांति और खुशी भी प्रदान करती है कलाः कार्टूनिस्ट संदीप जोशी

एमडीयू में तीन दिवसीय सुख सृजन कार्यशाला प्रारंभ।

रचनात्मकता बढ़ाने के साथ मन की शांति और खुशी भी प्रदान करती है कलाः कार्टूनिस्ट संदीप जोशी

रोहतक, गिरीश सैनी। खुशी एक यात्रा है, न कि मंजिल। इसे खोजने के लिए हमें अपने भीतर झांकना होगा और उन छोटी-छोटी चीजों को पहचानना होगा, जो हमें खुश करती हैं। प्रतिष्ठित कार्टूनिस्ट संदीप जोशी ने ये उद्गार एमडीयू के मनोविज्ञान विभाग तथा हैप्पीट्यूड लैबोरेट्री के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए।

इंटरनेशनल डे ऑफ हैप्पीनेस के उपलक्ष्य में सीडीओई के कांफ्रेंस भवन में आयोजित इस तीन दिवसीय सुख सृजन कार्यशाला का प्रथम दिन- हैप्पीनेस थ्रू एक्सप्रेसिव आर्ट को समर्पित रहा। मुख्य वक्ता प्रतिष्ठित कार्टूनिस्ट संदीप जोशी ने कहा कि कला के माध्यम से हम अपने भीतर के स्रोतों को पहचान सकते हैं और एक स्थायी खुशी की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। कला न केवल रचनात्मकता को बढ़ाती है, बल्कि मन की शांति और खुशी भी प्रदान करती है । उन्होंने स्केच, रंगों और ब्रश के माध्यम से कार्टून बनाने की कला साझा करते हुए इससे उत्पन्न होने वाली खुशी का अहसास प्रतिभागियों को करवाया।

कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि खुशी केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह हमारी सोच और दृष्टिकोण से जुड़ी होती है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, एक-दूसरे को प्रोत्साहन और प्रशंसा खुद रहने में मदद करते हैं। कुलपति ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए जीवन में खुशी के स्रोतों पर चर्चा की। उन्होंने मनोविज्ञान विभाग तथा हैप्पीट्यूड लैबोरेट्री की इस सुख सृजन कार्यशाला पहल की सराहना की।

सीडीओई निदेशक प्रो. नसीब सिंह गिल ने जीवन में खुशी के लिए सकारात्मक रवैया अपनाने की बात कही। कार्यक्रम के प्रारंभ में मनोविज्ञान विभागाध्यक्षा प्रो. अंजली मलिक ने स्वागत भाषण देते हुए इस तीन दिवसीय सुख सृजन कार्यशाला की थीम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में खुशी और संतोष को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कार्यशाला आयोजित की जा रही है। हैप्पीट्यूड लैबोरेट्री प्रभारी प्रोफेसर डा. दीप्ति हुड्डा ने अंत में आभार प्रदर्शन किया। प्रो. दीप्ति हुड्डा ने कहा कि खुशी ऐसी भावना है जो जीवन को सार्थक बनाती है। उन्होंने कहा कि खुशी केयरिंग और शेयरिंग में निहित है।

इस दौरान मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक- प्रो. शालिनी सिंह, प्रो. सर्वदीप कोहली, डा. शशि रश्मि, डा. बिन्दु अहलावत, कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन विभागाध्यक्षा प्रो. प्रीति गुलिया, अंग्रेजी विभाग की प्राध्यापिका डा. शीलू चौधरी, जनसंपर्क निदेशक सुनित मुखर्जी, पीआरओ पंकज नैन, विजुअल कम्यूनिकेटर पवन मल्होत्रा सहित विवि के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के तहत 21 मार्च को हैप्पीनेस थ्रू म्यूजिकल एक्सप्रेशन तथा 22 मार्च को हैप्पीनेस थ्रू क्रिएटिव सेल्फ एक्सप्रेशन सुख सृजन कार्यशाला आयोजित की जाएंगी।