भारतीय ज्ञान परम्परा एक सनातन ज्ञान प्रवाहः डॉ. रवि प्रभात

भारतीय ज्ञान परम्परा एक सनातन ज्ञान प्रवाहः डॉ. रवि प्रभात

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के संस्कृत विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रवि प्रभात ने केन्द्रीय विवि, हरियाणा के संस्कृत विभाग द्वारा- भारतीय ज्ञान परम्परा की अवधारणा विषय पर आयोजित व्याख्यान कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता शिरकत की।

डॉ. रवि प्रभात ने अपने प्रभावी संबोधन में भारतीय ज्ञान परम्परा को एक सनातन ज्ञान प्रवाह बताया जो कि चिर पुरातन एवं नित नवीन है। उन्होंने कहा कि  विश्व को ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करने का श्रेय भी भारतीय ज्ञान परम्परा को ही है और सर्वमान्य रूप से विश्व के आदि ग्रंथ के रूप में स्वीकृत ऋग्वेद का मुख्य विषय ज्ञान ही है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा की अवधारणा मात्र संस्कृत भाषा में सिमटी नहीं है , भारत भूमि की सभी भाषाओं,ज्ञान-विधाओं का इसमें समावेश है।

डॉ. रवि प्रभात ने अपने व्याख्यान में भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रमुख सिद्धांतो पर विस्तार से जानकारी दी। भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण से लेकर तमाम वैश्विक समस्याओं का समाधान भी भारतीय ज्ञान परम्परा में निहित है, अत: आवश्यकता है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने अपने परिचय भाग में जिस तरह भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को रेखांकित किया है,उसी रूप में उसका क्रियान्वयन भी हो।

इस दौरान कुलपति प्रो. टंकेश्वर ने अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की। कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. पायल कंवर चंदेल ने इस ज्ञानवर्धक व्याख्यान की सराहना करते हुए भविष्य में और भी इस प्रकार के व्याख्यानों के आयोजन के लिए पूर्ण सहयोग देने की बात कही। संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. देवेंद्र राजपूत एवं सहायक प्रोफेसर डॉ. सुमन रानी ने इस कार्यक्रम का समन्वय एवं संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन किया।