गुजवि में कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने किया ध्वजारोहण

गुजवि में कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने किया ध्वजारोहण

हिसार, गिरीश सैनी। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि में 76वां गणतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया। महाराणा प्रताप स्टेडियम में आयोजित समारोह में कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस दौरान जे.सी. बिश्नोई विशेष रूप से उपस्थित रहे। साथ ही गुजवि की प्रथम महिला डा. वंदना बिश्नोई व विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. विनोद छोकर भी मौजूद रहे।

विवि के सुरक्षा दस्ता, एनसीसी केडेटस तथा एनएसएस स्वयंसेवकों ने परेड प्रस्तुत की।  इस दौरान देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई।

कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि हमारे देश का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। यह एक जीवित दस्तावेज है, जो हमारे देश के हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है।  यह हमारी एकता का प्रतीक है, जो विविधता में एकता के अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है।  हमारा संविधान न केवल हमारे अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि यह हमें यह भी सिखाता है कि हम कैसे अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए एक विकसित और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।  पिछले 75 वर्षों में हमारे देश ने शिक्षा, स्वास्थ्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, उद्योग और बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व प्रगति की है।  आज भारत फार्मास्युटिकल, रिन्यूएबल एनर्जी, आईटी सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।  

प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि गुरु जम्भेश्वर महाराज के नाम से स्थापित यह विवि लगातार 23 साल से नैक द्वारा 'ए' ग्रेड मान्यता प्राप्त है। यह विवि अब 'ए प्लस' ग्रेड मान्यता प्राप्त करके प्रदेश का एकमात्र विश्वविद्यालय बना है। विश्वविद्यालय का एच-इंडेक्स 130 है, जो कि हरियाणा प्रदेश में सर्वाधिक है।

खेल निदेशालय के सौजन्य से विवि कर्मियों के बच्चों के लिए विभिन्न आयु वर्ग की दौड़ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने वाले कर्मचारियों, सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों, एनसीसी कैडेटस, एनएसएस स्वयंसेवकों तथा दौड़ प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को सम्मानित किया। मंच संचालन उपनिदेशक जनसंपर्क डा. बिजेन्द्र दहिया ने किया।