युवा संसद केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भविष्य के नेताओं और नीति निर्माताओं की आधारशिला हैः सांसद धर्मवीर सिंह
जया, राहुल, वंदिता, अर्शी, मोनू झा व प्रथम बने सर्वश्रेष्ठ वक्ता।

गुरुग्राम, गिरीश सैनी। एमडीयू के गुरुग्राम स्थित सेंटर फॉर प्रोफेशनल एंड एलाइड स्टडीज़ (सीपीएएस) द्वारा भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय के तत्वावधान में 17वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद धर्मवीर सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
मुख्य अतिथि धर्मवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि आज का युवा कल का नीति-निर्माता है। यदि हम अपने विचारों को सही दिशा में ढालें, तो न केवल हमारा व्यक्तिगत विकास होगा, बल्कि हम देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव भी रख सकेंगे। यह युवा संसद केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भविष्य के नेताओं और नीति निर्माताओं की आधारशिला है। उन्होंने युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया
कार्यक्रम अध्यक्ष, एमडीयू कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने युवा संसद प्रतियोगिता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवा संसद केवल बहस का मंच नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रक्रिया है जो आपको वास्तविक राजनीति, नीति निर्माण और समाज सेवा की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संसद की कार्यप्रणाली को समझते हुए प्रतिभागियों ने विभिन्न विधेयकों पर सार्थक चर्चा की है, यह प्रमाण है कि हमारा युवा वर्ग देश की दिशा और दशा को लेकर सजग है। उन्होंने कहा कि युवा अब केवल मुद्दों पर चर्चा नहीं करते, बल्कि उनके ठोस समाधान भी प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रतियोगिता की शुरुआत नवनिर्वाचित युवा सांसदों द्वारा शपथ ग्रहण से हुई। इसके बाद, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके आर्थिक सुधारों और शासन में योगदान को याद किया गया। युवा सांसदों द्वारा संसद सत्र के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए गए, जिनमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए काउंसलिंग केंद्रों की स्थापना, उत्पीड़न को रोकने और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए विशेष उपाय के लिए मानसिक स्वास्थ्य विधेयक, खेल सुविधाओं और प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार एवं खेल को करियर विकल्प के रूप में बढ़ावा देने के लिए खेल विकास विधेयक मुख्य है।
युवा संसद के प्रश्नकाल में विपक्षी सांसदों ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कई ज्वलंत मुद्दों पर जवाब मांगे। इस दौरान विपक्ष ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर तीखी बहस हुई।
विद्यार्थियों योगेश, मिनी, वंदिता, प्रिया, निधि, राहुल, मोनू झा ने सत्ताधारी दल के मंत्री एवं विपक्षी सांसदों के रूप में अपनी छाप छोड़ी।
निदेशक, एमडीयू-सीपीएएस प्रो. प्रदीप अहलावत ने सभी गणमान्य अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को संसदीय प्रक्रियाओं, नीति निर्माण और लोकतांत्रिक प्रणाली की समझ प्रदान करने की उद्देश्य से आयोजित इस प्रतियोगिता में 55 विद्यार्थियों ने भाग लेकर अपने उत्कृष्ट वाद-विवाद और नीति निर्माण कौशल का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन संसदीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार की प्रतिनिधि शालिनी, सांसद धर्मवीर सिंह एवं केंद्रीय विद्यालय संगठन के प्राचार्य कर्मवीर ने किया। इस प्रतियोगिता में जया (स्पीकर), राहुल, वंदिता, अर्शी, मोनू झा व प्रथम को सर्वश्रेष्ठ वक्ता के रूप में चुना गया। मंच संचालन डॉ. सुनील देवी एवं डॉ. कविता दहिया ने किया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अनुपम ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान अवसर पर जिला बार काउंसिल गुरुग्राम के अध्यक्ष निकेश यादव, समाजसेवी कुलभूषण भारद्वाज, प्रो. जितेंद्र ढुल सहित प्राध्यापक, शोधार्थी व विद्यार्थी मौजूद रहे।